क्या हवाई जहाज़ के टॉयलेट की गंदगी हवा में ही उड़ा दी जाती है? जाने पूरा सच

हवाई जहाज की यात्रा का सपना हर मिडिल क्लास फैमिली वालों का होता है. हो भी क्यों ना, हवाई यात्रा समय भी बचाती है और इसे सुरक्षित यात्रा भी माना जाता है. हवाई यात्रा के दौरान पैसेंजर की हर सुख-सुविधा का ध्यान रखा जाता है. भारत में भी अब बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों के लिए भी हवाई यात्रा की सुविधाएं शुरू होने लगी हैं. अब हवाई यात्रा में अमीर के अलावा हर कोई बैठने की चेष्टा करने लगा है. हवाई जहाज से जुड़ी हर बात (Aeroplane facts in Hindi) हर कोई जानना चाहता है.वैसे ही अगर आपने हवाई यात्रा की है तो कुछ बातें आपके मन में भी आई होंगी जिसमें Toilet की गंदगी कहां फेंकी जाती है ये कॉमन है.

हवाई जहाज से जुड़ी दिलचस्प बात | Aeroplane facts in Hindi

हवाई जहाज के टॉयलेट की गंदगी कहां जाती है,अगर ये सवाल आपके मन में है तो आपको ये जानना बेहद जरूरी है कि हवाई जहाज में यात्रा के दौरान यात्रियों का मल टॉयलेट से सीधा नहीं गिरता है. वह जहाज में पाए जाने वाले एक टैंक में जाकर इकट्ठा होता है. दरअसल इस समय हर हवाई जहाज में वैक्यूम टॉयलेट बने होते हैं और जहाज के टॉयलेट में फ्लश करे के लिए पानी का इस्तेमाल भी नहीं होता है. उस वैक्यूम प्रणाली के जरिए कमोड से सीधे टैंक में वो मल या गंदगी चली जाती है. प्लेन का वैक्यूम टॉयलेट पानी और ठोस मल को अलग करता है. सभी हवाई जहाज के ये टैंक विशेष प्रकार के होते हैं जहां यात्रियों का सारा मल इकट्ठा होता है और उसकी कैपिसिटी लगभग 200 लीटर की होती है.

हवाई जहाज का वो टैंक कब किया जाता है खाली?

एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मल या गंदगी से भरे वे टैंक खाली कर दिए जाते हैं. फ्लाइट के टॉयलेट टैंक को यात्रा खत्म होने के बाद एयरपोर्ट पर खाली किया जाता है. इसकी जिम्मेदारी लैवेटरी स्टाफ की होती है जो एक खास तरीके का Lavatory Tank लेकर हवाई जहाज के पास जाता है. स्टाफ लैवेटरी टैंक 3 से 4 इंच चौड़े होते हैं जो टॉयलेट टैंक से कनेक्ट होता है और फिर लीवर घूमाता है. लीवर घुमाते ही जहाज के टॉयलेट टैंक में इकट्ठा मल कुछ ही मिनटों में खाली हो जाता है और जहाज के टैंक से निकालकर लैवेटरी टैंक तक पहुंचाया जाता है. इन लैवेटरी टैंकों को एक अलग जगह खाली किया जाता है जिसके बाद हवाई जहाज का टैंक साफ कर दिया जाता है.

हवाई जहाज से जुड़ी कुछ और बातें

1. हवाई जहाज के टॉयलेट के दरवाजे अंदर से लॉक होते हैं फिर भी उन्हें बाहर से खोल सकते हैं. ये इसलिए होता है क्योंकि आपातकाल की स्थिति में लोग जल्दी बाहर आ सकें.

2. ऊंचाई पर उड़ने के कारण हमारी सूंघने की शक्ति कम हो जाती है. इसी वजह से हवाई जहाज में खाने का स्वाद कम लगता है.

3. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुर्घटना के समय हवाई जहाज के पिछले हिस्से में बैठे व्यक्तियों की जान को खतरा 40 प्रतिशत तक रहता है.

4. हवाई जहाज को ऐसा डिजाइन किया जाता है जिससे उसे आसमानी बिजली से कोई नुकसान नहीं हो. इससे पहले बिजली गिरने से प्लेन क्रैश होने की खबर साल 1963 में आई थी उसके बाद इस वजह से हादसे नहीं हुए.

5. एक रिसर्च के मुताबिक, हवाई जहाज के टेकऑफ होने के बाद के पहले 3 मिनट और लैंड होने के 8 मिनट पहले 80 प्रतिशत प्लेन क्रैश की दुर्घटनाएं होती हैं

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