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परमाणु क्षमता से लैस एकलौती भारतीय पनडुबबी लौटी रूस, जानिए क्यों जा रही वापस…

हमारे भारत देश की एकलौती पन डुबबी 4 जून  परमाणु हमले में सक्षम भारत की एकलौती पनडुबबी आईएनएस चक्र वापस रूस जा रही है भारत ने इस पनडुब्बी को रूस से लीज पर लिया था जिसका एग्रीमेंट अब खत्म होने जा रहा है. इसकी जगह लेने वाली दूसरी पनडुब्बी को भारतीय नौसेना में शामिल होने में कम से कम 5 वर्ष का समय लग सकता है.

सिंगापुर के पास देखी गई चक्र…
सोशल मीडिया पर आईएनएस चक्र की तस्वीरें सामने आई हैं,
जिसमें यह रूसी नौसेना के एस्कॉर्ट के साथ नजर आ रही है।
यह तस्वीरें ऐसा कहा जा रहा है सिंगापुर के पास की बताई जा रही हैं.
आईएनएस चक्र पनडुब्बी को 10 वर्ष की लीज पर लिया गया था जो कि अगली जनवरी में समाप्त हो रही है सूत्रों के अनुसार इसे पहले ही रूस भेजा जा रहा है यहां पर इसे नष्ट किए जाने की संभावना है।

Indian Navy की परमाणु क्षमता से लैस एकलौती Submarine वापस लौटी Russia जानिए वजह..

पुरानी हो चुकी थी आईएनएस चक्र….

बहुत पुरानी पनडुब्बी होने के कारण आईएनएस चक्र के संचालन में नौसेना को बहुत ही मुश्किल आ रही थी. यही कारण है कि पिछले 2 वर्षों में इसे शायद ही कभी समंदर में उतारा गया हो.लेकिन भारतीय चालक दल को अब अपने ही देश में विकसित परमाणु सशस्त्र पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत पर प्रशिक्षित किया जा रहा है.इसके साथ ही परमाणु हमले में सक्षम पनडुब्बियों के निर्माण के लिए एक स्वदेशी परियोजना पर कार्य चल रहा है।पिछले कुछ दशकों से भारत रूस के परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियों को लीज पर लेता रहा है.भारत इससे देश में निर्मित जहाजों पर अपने चालक दल को प्रशिक्षित करता है इसकी शुरुआत 1998 से की गई थी. जब मूल आईएनएस चक्र को 3 वर्ष की लीज पर लिया गया था.दूसरी बार 2012 में लंबे वक्त तक मरम्मत के बाद शामिल किया गया था। इस बार भी इसका नाम चक्र ही रखा गया 5 वर्ष बाद चक्र -|||

मार्च 2019 में भारत ने रूस के साथ एक और परमाणु हमले में सक्षम पनडुब्बी को लीज पर देने के लिए 3 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसे स्वदेशी संचार प्रणालियों और सेंसर से लैस कर तैयार किया जाएगा। चक्र -||| नाम से आने वाली इस पनडुब्बी का महत्व इस बात से है कि रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 5.5 अरब डॉलर डील के बाद मास्को के साथ यह दूसरा सबसे बड़ा सौदा था.

जानकारी के अनुसार रूस में इस पनडुब्बी पर पहले ही काम शुरू हो चुका है और पुनर्निर्माण के बाद 5 वर्ष के भीतर शामिल होने के लिए तैयार होने की संभावना है. इस दौरान आईएनएस चक्र की लीज़ को 5 वर्ष तक बढ़ाए जाने पर चर्चा हुई थी लेकिन उसे लंबे समय तक संचालन के लिए सही नहीं पाया गया था।

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