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पानी की कमी होने पर 62 वर्ष के भोलानाथ ने अपने जुनून से अकेले तलाब खोद डाला –

पृथ्वी का 70% भाग पानी से घिरा हुआ है. लेकिन एक चौथाई भाग पानी पीने योग्य है. जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती जा रही है. उसी के साथ पीने के पानी की समस्या भी बढ़ती जा रही है. आज भी कुछ गांव ऐसे हैं जहां पर पानी नहीं है. बच्चे,महिलाएं कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लेकर आते हैं. आज हम आपको एक व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं.जिसने अपने परिवार के लिए ही नहीं गांव वालों के लिए पानी की व्यवस्था की है. 62 वर्षीय भोलानाथा एक किसान है. जो धनवाद के महरायडीह गांव के रहने वाले हैं. उनके गांव में पानी की बहुत समस्या है.

अनेकों किलोमीटर दूर जाकर पानी लेकर आते हैं. इस समस्या को हल करने के लिए भोला नाथ तसोचने लगे कि इस समस्या को किस प्रकार हल किया जाए. गांव की बहू बेटियों को इतनी दूर जाकर पानी लेकर आना पड़े. सबसे पहले उन्होंने अपने खेत में एक कुआं खोदा, अब तक वे अपने गांव में तीन हुए खोद चुके हैं. इसके बाद भोलानाथ ने बारिश के पानी को इकट्ठा करने के बारे में सोचा. इस पानी से गांव के प्रत्येक लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा और इसी के साथ खेतों की सिंचाई भी अच्छे से होगी.

अपना यह विचार भोलानाथ ने गांव के सामने रखा और कहा कि हमें बारिश का पानी इकट्ठा करना चाहिए. जिससे हम पानी की समस्या को दूर कर सकते हैं. पर गांव वालों ने बोला भोला नाथ की बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया. तब भोलानाथ नें अकेले ही अपने गांव में एक तालाब खोदने का निश्चय किया. वे अपने बात पर अडिग रहें. उनके पास खेती के लिए थोड़ी सी जमीन थी. उसी जमीन पर उन्होंने तलाब होना शुरू कर दिया. वे रोज सुबह तालाब खोदने के लिए निकल जाते. पूरे दिन मेहनत करते और शाम को अपने घर आ जाते.

इस बात के कारण भोला नाथ का बहुत मजाक उड़ाया जाता था . और उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं थी. वे अपने द्वारा लिए गए संकल्प को पूरा करने में लगे हुए थे. वे सिर्फ अपने गांव की पानी की समस्या को दूर करना चाहते थे. एक दिन उनकी मेहनत रंग लाई. उन्होंने 3 महीने कड़ी मेहनत कर करीब 100 फीट चौड़ा और 26 फुट गहरा तालाब अकेले ही खोद डाला. जब पूरे गांव ने इस तालाब को देखा तो वे सभी हैरान हो गए. भोलानाथ उनके द्वारा किए गए परिश्रम की सराहना करने लगे. और आज पूरा गांव इस तालाब का उपयोग करता है. भोलानाथ इस बात से खुश है कि उनके द्वारा की गई मेहनत सफल रही.और उन्होंने अपने गांव की पानी की समस्या को दूर किया.

एक तलाक होने के बाद भोलानाथ, दूसरा तालाब भी खोद रहे हैं. 100 फिट व्यास वाला यह तालाब वे अकेले ही खोद रहे हैं. गांव के प्रधान ने भोलानाथ बहुत प्रशंसा की है. और कहा है कि सरकार को ऐसे लोगों को सम्मानित करना चाहिए. जो सिर्फ अपने बारे में नहीं सोचते. हमें भोलानाथ से प्रेरणा लेनी चाहिए. एक इंटरव्यू में भोलानाथ ने बताया मैने साल 1994 मे तलाब खोदना शुरू किया था.

मैं रोज सुबह कुदाल फावड़ा निकल जाता था. मेरे हाथ में छाले पड़ जाते थे. कुछ दिन में इन छालो के ठीक होने का इंतजार करता. फिर अपने काम पर लग जाता. मैं कभी भी अपने काम से पीछे नहीं हटा. लोग मेरी हंसी भी उड़ाते थे. आज मेरी 4 साल की मेहनत रंग ला चुकी है. आज मुझे बहुत खुशी महसूस होती है कि मेरे द्वारा खुद आ गया यह तालाब गांव के सभी लोगों के काम आ रहा है ।

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