शहीद होने के बाद भी 52 सालो से ड्यूटी कर रही इस फौजी की आत्मा ,हर महीने मिलते है इतनी तनख्वाह

देशसेवा करने वाले सैनिक अपनी जान हथेली पर रखकर कि देश एवं देशवासियों की रक्षा में सदैव तैनात रहते हैं.सैनिक के बदौलत ही देश के लोग बेखौफ जी पाते हैं.जीते जी तो यह सैनिक देश की रक्षा करते हैं लेकिन क्या आपने कभी यह कल्पना की है कि किसी सैनिक में देशभक्ति का जुनून इस कदर हो कि वह मरने के बाद भी अपनी ड्यूटी निभा रहा हो,और सीमा पर तैनात हो.यह बात सुनने में आपको जरूरअजीब लग सकती है लेकिन या हकीकत है.आज हम आपको भारत के ऐसे ही सैनिक की कहानी बताने जा रहे हैं,जिसमें देश भक्ति का जुनून इस कदर है कि वह मरने के बाद भी अपनी ड्यूटी निभा रहे है.

यह किस्सा सिक्किम से जुड़ी भारत चीन सीमा पर तैनात सेना के शहीद वीर जवान का है.जिन्होंने देश की सेवा पूरी कर्तव्यनिष्ठ के साथ की लेकिन हैरानी की बात यह है कि मृत्यु के बाद भी यह सैनिक देश की रक्षा में तैनात हैं.यहां पर इनकी आत्मा सरहद की सुरक्षा करती है.और तो और इनकी आत्मा को इसके लिए सैलरी भी मिलती है और इनका प्रमोशन भी होता है.यहां पर इस शहीद सैनिक की याद में एक मंदिर का भी निर्माण कराया गया है.यह मंदिर लाखों लोगों की आस्था का आधार बन चुका है.इस सैनिक की आत्मा की मौजूदगी की पुष्टि भारतीय सेना के कई जवान एवं चीन सैनिक भी कर चुके हैं.

दोस्तों हम बात कर रहे हैं भारतीय सेना के फौजी बाबा हरभजन सिंह के बारे में.यह भले ही अविश्वसनीय लग रहा हो लेकिन या घटना पूरी तरह से वास्तविक है.बाबा हरभजन सिंह का जन्म 30 अगस्त सन 1960 पंजाब के सरदाना गांव में हुआ था.बाबा हरभजन सिंह 24 पंजाब रेजीमेंट जवान थे.सन 1968 में हुए एक हादसे के दौरान ड्यूटी पर रहते हुए यह शहीद हो गए थे.हादसे के काफी समय बाद तक इनका पार्थिव शरीर नहीं मिल सका था.

बताया जाता है कि हरभजन सिंह खुद सपने में आकर के अपने शव के बारे में जानकारी दे कर के गए थे.जब अगले दिन सर्च ऑपरेशन हुआ तो उनका पार्थिव शरीर उसी जगह पर मिला जहां सपने में बाबा हरभजन सिंह ने बताया था। उनका अंतिम संस्कार किया गया और वहीं पर हरभजन सिंह का बंकर बना दिया गया.जहां पर इनकी पूजा होने लगी.

आपको बता दें कि इसके बाद एक बार फिर बाबा हरभजन सिंह की आत्मा ने उसी सैनिक को सपना दिया और सपने में सैनिक से कहा कि आज भी अपनी ड्यूटी वह पूरी कर्तव्य निष्ठा के साथ निभा रहे हैं.इसके साथ ही बाबा हरभजन सिंह ने यह भी इच्छा जाहिर की कि उनकी एक समाधि बनाई जाए.बाबा हरभजन सिंह की इच्छा का सम्मान करते हुए वहां पर एक समाधि में बनवाई गई.सन 1982 में बाबा हरभजन सिंह की समाधि सिक्किम की राजधानी गंगटोक के लेलेपला दर्रे और नाथुला दर्रे के बीच में बनवाई गई.बताया जाता है कि यह मंदिर 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.लेकिन इसके बावजूद लाखों लोगों की आस्था इनसे जुड़ी हुई है दूर-दूर से श्रद्धालु इस मंदिर में अपना माथा टेकने के लिए आते हैं.

इस मंदिर में हरभजन सिंह की कुछ चीजें स्थापित की गई है जिनमें कि उनकी एक फोटो और उनके जूतों को भी जगह दी गई है.हैरानी की बात यह है कि बाबा हरभजन सिंह की मौजूदगी केवल भारतीय सैनिक नहीं बल्कि चीन के सिपाही भी महसूस करते हैं.खबरों के मुताबिक हरभजन सिंह की शहादत के बाद नाथुला के नजदीक चीन सेना की हर गतिविधि पर यह कड़ी नजर रखते हैं.और किसी भी घटना की जानकारी सपने के माध्यम से अपने साथियों तक पहुँचा देते हैं.इनके द्वारा दी गई सभी जानकारियां हमेशा सही सिद्ध होती हैं.

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