शर्मनाक: चंडीगढ़ में लोग घर ले गए स्मार्ट साइकिलें, जीपीएस से कंपनी ने लगाया पता तो बोले-काम करके लौटा देंगे

समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो लापरवाही और दूसरों का सामान को गैर ज़िम्मेदाराना तरीके से इस्तेमाल करने में पीछे हो. ऐसे लोगों की कमी नहीं एक ढूंढे हजार मिल जाएंगे जिन्हें ना तो अपने मान की फिक्र होती है ना दूसरे के सम्मान की ना उसके सामान और पैसे की ऐसा ही अब एक मामला सामने आया है जिसे देखने और जानने के बाद काफी हैरानी होती है. तो आइए हम आपको बता दें क्या है पूरा मामला.

12 अगस्त को शहर में स्मार्ट बाइक शेयरिंग योजना शुरू हुई थी.कंपनी ने 155 डॉकिंग स्टेशन से1250 साइकिले संचालित की.उद्घाटन के दूसरे दिन ही नेटवर्क की समस्या के चलते एप ने काम नहीं किया तो स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने साइकिल के उपयोग पर शुल्क ना लेने का आदेश जारी कर दिया.

आपको बता दें चंडीगढ़ में पहले स्मार्ट साइकिलो का सामान चोरी हो रहा था अब कुछ लोगों ने इन्हीं को ले जाकर अपने घरों पर ही रख लिया है जीपीएस के द्वारा से कंपनी ने सेक्टर 45 और बुढ़ेल से 6 साइकिले को बरामद भी कर लिया है. लेकिन एक घर से दो जबकि दुसरे घर से तीन साइकिल मिली हैं. साइकिल लेने गई थी हमसे लोगों ने यह भी कह दिया कि अभी रहने दो काम खत्म करके लौटा देंगे 12 अगस्त को शहर में स्मार्ट बाइक शेयरिंग योजना शुरू की गई थी कंपनी ने 155 डॉकिंग स्टेशन से 1250 साइकिल ले संचालित की थी उद्घाटन नेटवर्क समस्या आने से ऐप ने काम करना बंद कर दिया स्मार्ट सिटी लिमिटेड में साइकिल के उपयोग पर कोई भी शुल्क ना लेने के आदेश दे दिए.

लेकिन लोगों की लापरवाही कहें या इसको जागरूकता की कमी कहीं जाए. लोग साइकिल एक बार लेकर स्टैंड में वापस ही नहीं रख रहे हैं. पहली बार छह साइकिल स्टैंड से गायब हो गई थी खोजने पर यह पता चला कि लोग साइकिल घर ले गए हैं टीम में घरों से जाकर साइक्लो को बरामद तो कर लिया आने वाले समय में सेक्टर 38,47 46,37, 39,43 दशहरा ग्राउंड डडू माजरा गुड़हल के क्षेत्र में काफी परेशानियां हैं यहां सबसे ज्यादा साइक्लो का सामान चोरी हुआ है क्या टूटा मिला है कंपनी ने अपनी टीमों को यहीं पर सबसे ज्यादा ध्यान रखने को कहा है.

लॉक नंबर याद कर फाड़ देते हैं कोर्ट की पर्ची….

जानकारी के अनुसार कुछ साइकिले ऐसी मिली जिनकी कोड की पर्ची फटी थी इसके बावजूद वो उपयोग हो रही थी जांच करने पर यह भी पता चला कि एक ही व्यक्ति उनका उपयोग कर रहा था. संबंधित व्यक्ति ने साइकिल का लॉक नंबर याद कर लिया और कोड का स्पीकर फाड़ दिया इस कारण उसका साइकिल का उपयोग केवल वही कर रहा था.कंपनी को साइकिल का कोड खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है एक साइकिल की कीमत लगभग ₹500 है.

एक माह में मिली 178 शिकायतें….

खबरों के मुताबिक लगातार चोरी हो रहे समान और साइकिलो में टूट-फूट के बाद कंपनी शनिवार को एसएसपी कुलदीप चहल को शिकायत तो देगी कंपनी ने 8 लोगों की दो टीमें भी गठित कर दी है. यह टीमें 2 जोन में टॉकिंग स्टेशनों को बांटकर 24 घंटे निगरानी कर रही है.तय समय सीमा में टीम के सदस्य डॉकिंग स्टेशन पर निरीक्षण करने पहुंचते रहते हैं.साइकिल लोगों की संपत्ति है इसे ठीक रखना भी उन्हीं की जिम्मेदारी है.इसे बेहतर करने के लिए स्मार्ट सिटी और नगर निगम तत्पर है.इसलिए इसे नुकसान ना पहुंचा कर व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करें इसके लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे.

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