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Guru Nanak Jayanti : क्या हुआ जब मुगल बादशाह बाबर ने गुरु नानक को कैद कर लिया…

भारतीय इतिहास में मुगल साम्राज्य का विशेष योगदान है.एकल भारत की परिपाटी रचने का श्रेय मुगलों को जाता है.भारत में मुगल साम्राज्य की नीव बाबर ने डाली थी.बाबर ने भारत में 1519 से 1526ने बीच कई युद्ध किए थे लेकिन अंतिम युद्ध 1526 में पानीपत के मैदान में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य का नीव डाली थी.उसी समय भारत में प्रसिद्ध सिख संत गुरु नानकदेव बाबर के समकालीन थे.

उनका जीवन काल 1468 से 1539 के बीच था.सिख समुदाय का महत्वपूर्ण ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में गुरु नानक ने लिखा है की “बबरवानी फिरी गई कुईरू ना रो खाई” यह सूक्ति उन्होने बाबर के भारत आक्रमण के बाद के परिणाम को बताने के लिए कहा था.जिसका अर्थ है की बाबर साम्राज्य फेल रहा है, जुल्म की हद ये है की शहजादियों तक ने भी खाना नही खाया है.बाबर के बारे में गुरु नानक साहब ने कई बातो के बारे बताया था.उन सभी के संग्रह को बबरवानी कहा गया.मुगल बादशाह बाबर के आक्रमणों से होने वाले परिणामों का गंभीर आकलन किया था.

बाबर के दिल्ली आक्रमण के समय गुरुनानक देव पद यात्रा पर थे.शहर के वालो लोगो की तरह उन्हे भी कैद कर दिया गया था.गुरुनानक देव को जब कैद किया गया था तो भी उन्होंने अपना भजन कीर्तन और प्रवचन देना बंद नही किया था.जब बाबर को पता चला की उसकी कैद में गुरु नानकदेव है तो उसने फोरन रिहा कर दिया था और कहा ही ये संत है इनके नूरानी चेहरे से पता चल गया.

नानक साहब ने बाबर को कहा की मेने तुम्हे पहले से रिहा कर दिया है तुम अल्लाह से माफी मांगो या उसके बंदों को आजाद करके माफी ले सकते हो.बाबरगाथा में नानक साहब ने चार भागों में बांटा है.पहले भाग में महिलाओ का अत्याचार को उल्लेखित किया गया है.दूसरे भाग में आम लोगो पर आक्रमण का प्रभाव को बताया है.तीसरे चरण में उन महिलाओं का जिक्र है जो महलों में रहती थी लेकिन अभी उनके हालात बुरे हो गए है.चौथे चरण में सबसे शक्तिशाली रब का जिक्र है.

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