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ये 25 तस्वीरें बताती हैं 2000 साल पहले लोग अजब-गज़ब तरह के Footwears पहनते थे

दोस्तों अगर हम बात करे आधुनिक फैशन की तो आज हम पहनावे से पहचान सकते है की कौन कितना पैसे वाला,और मध्यम परिवार,ग़रीब परिवार से है,फिर भी आज कल के फैशन से कोई अनजान नहीं है,जिसमे लड़के लड़कियों वाले,और लड़कियां लड़को वाले फैशन को फॉलो करती है,पुराने जमाने में किसी अन्य राज्य के व्यक्ति को उसके पहनावे और उसकी सर की पगड़ी से पहचान लिया जाता था की व्यक्ति किस दिशा,राज्य से आया है,आज तो ऐसा सम्भव ही नहीं है,खैर दोस्तों आज का आर्टिकल जूतों पर है जिसे हम बखूबी आप को बताएँगे की किस समय कैसे लोग कैसे जुटे पहना करते थे,आज का ये आर्टिकल आप की जानकारी को बढ़ने वाला है,तो चलिए शुरू करते है

दोस्तों जूतों का इतिहास मनुष्य की उत्पत्ति से कुछ समय बाद का ही है,यानि बीस-तीस हजार साल पुराना,क्यों के दोस्तों मनुष्य हमेशा से ही नए नए अविष्कार करता आया है,अपनी जरूरतों के अनुसार,कभी अपने काम काज या जीवन यापन,कभी खुद को बचाने के लिए,यहाँ बचाने से मतलब है की जब मनुष्य को हद से ज्यादा सर्दी,गर्मी का अहसास हुआ तो उसने कुछ जानवरो की चमड़ों से खुद के शरीर को ढांकना शुरू किया,जब उसे लगा की पैरो से सर्दी,गर्मी का अहसास ज्यादा होता है तो उसने उन्ही चमड़ों से खुद के पैर के लिए जूते बनाये अब ये जूते कुछ ऐसे होते थे की सर्दी -गर्मी को पैरों पर लगने से बचा सके और चलने में आराम दायक को,तो इन जूतों में प्राचीन कालीन मनुष्यों ने विशेष घांस और पत्तो को डाला ताकि पैर आरामदायक रहे.

दोस्तों समय समय पर इन जूतों में काफी बदलाव होता रहा,काम,नाम,उपाधि,के अनुसार जूतों का वर्गीकरण होता रहा,जैसे कबीले के मुखिया के जूते विशेष होते थे उनमे कई आदम खोर जानवरों की छोटी हड्डियां होती थी,सुंदरता के लिए उसमे कई समुंद्री सीपों का इस्तेमाल किया जाता था,मुखिया के जूते हमेशा उसके घुटनों तक आया करते थे,जो एक विशेष पट्टी नुमा आकर को दर्शाती थी,

इसी प्रकार देश के राजा के जूते कई मेहनत के बाद तैयार किये जाते थे क्योंहै की इन जूतों में मखमल का इस्तेमाल होना शुरू हो चूका था,सोने और चांदी के तारों का काम किया जाता था,ताकि राजाओ की सभा में सब से ज्यादा उसी के चर्चे हो,

यौद्धा के जूते भी विशेष जानवरों की चमड़ी से बनाये जाते थे ताकि युद्ध भूमि में यौद्धा को काम चोट आये,दुश्मन के प्रहार से बचा सके,रेगिस्तानी इलाकों में जूतों की बनावट कुछ अलग हो जाया करती थी,इन जूतों में मोटाई का विशेष ध्यान रखा जाता था ताकि पैरो में गर्म मिटटी न असर कर सके,और साथ ही जरुरी सामान रखने का एक अलग पॉकेट नुमा साँचा बयाना जाता,जैसे पानी रखने,चाकू रखने,जैसा पॉकेट जैसे-जैसे जूतों का चलन शुरू हुआ वैसे वैसे इनके काम करने वाले भी ज्यादा होते गए,जो की अपनी सूझ बुझ से जूतों में बदलाव करते गए,आज कल के जूते बस इंसान की तरक्की को दर्शाते है,दोस्तों आज भी देश के कई इलाकों में ऐसे भी है जहाँ पर लोग नंगे पांव ही है,

1. मिस्र की गोल्ड फन्नेरी सैंडल

2. गोल्ड सैंडल और पैर की उंगलियों के कवर

3. 19 वीं सदी के इंफ़ॉर्मेल इंग्लिश स्लिपर्स

4. बीजान्टिन जूते

5. प्राचीन मिस्र के सैंडल

6. पहली सदी के चमड़े की चप्पलें

7. लियाओ राजवंश के एक बच्चे का जूता

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