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जानिए चीन के मंगल गृह पर भेजे गए नए रोवर के बारे मे..

आपको बता दें चीन ने पिछले वर्ष जुलाई माह में अपने मंगल अभियान प्रक्षेपित किया था. इसमें एक आरबिटर लैंडर और रोवर एक साथ मंगल की ओर भेजे गए थे. अब चीन का रोवर मंगल पर सफलता पूर्वक उतर गया है इस तरह चीन मंगल पर रोवर उतारने वाला दुनिया का दूसरा देश बन चुका है यह जल्द ही मंगल के वायुमंडलीय और भूगर्भीय अध्ययन करेगा।  ज्योरॉन्ग रोवर नाम का यह रोवर मंगल के उत्तरी गोलार्ध के विशाल मैदान में यूटोपिया प्लेनिटा पर उतरा है.चीनी लोककथाओं में ज्योरॉन्ग का मतलब आग का देवता है.इस अभियान में चीन का जोर उस समय पर है जो मंगल ग्रह (Mars )के पृथ्वी के पास होने से मिली है.

ऐसा हर 2 वर्ष में एक बार होता है चीनी वैज्ञानिक अब कम से कम अगले 90 दिनों में मंगल का भूगर्भीय अध्ययन करने पर ध्यान देंगे.लेकिन ज्योरॉन्ग रोवर लैंडर से फौरन ही अलग नहीं होगा. पहले यूटोपिया मैदान का सर्वेक्षण किया जाएगा और वहां की उच्च विभेदन तस्वीरों के द्वारा रोवर को खोलने के लिए सही जगह का चुनाव किया जाएगा इसका मकसद उबड़ खाबड़ जमीन से बचते हुए सपाट जगह को खोजा जाएगा इसके बाद रोवर लैंडर से अलग होगा और वह अमरीकी पारसीवियरेस  और क्यूरोसिटी रोवर के साथ मिलकर मंगल ग्रह का अन्वेषण करेगा .

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार ज्योरॉन्ग रोवर  का भार 240 ग्राम है और यह नासा (NASA ) के सिप्रिट और अपॉर्चुनिटी रोवर से थोड़ा भारी है लेकिन यह पर्सीवरेंस और क्यूरिसिटी के भार का एक चौथाई ही है जीयुरॉन्ग में शक्तिशाली वापस खींच लेने योग्य सौर पैनल लगे हैं जिसमें 7 मूल उपकरण भी हैं इनमें कैमरा जमीन के अंदर विभेदन कर सकने वाले रडार एक मैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर और एक मौसम स्टेशन शामिल है इस कारण और मंगल की सतह के नीचे पुरातन जमीन के संकेतों के साथ ही वहां मौजूद तरल पानी की भी तलाश करेगा.
मंगल पर लैंडिंग आसान कार्य नहीं है यह हमारे सौरमंडल में सबसे कठिन लैंडिंग वाले इलाकों में से एक होता है चीन के तियानवेंन 1  यान ने तीन महीने तक लाल गिरह के चक्कर लगाए थे उसके पश्चात उससे रोवर को उतारने वाला लेंडर अलग हुआ और मंगल की सतह की और नीचे आया.इससे पहले 1976 में नासा का वाइकिंग 2 यान यहां उतरा था.

चीन की स्पेस खबर ने बताया कि मंगल के वायुमंडल से गुजर कर नीचे आने में दौरान के 9 मिनट खौफनाक थे. नीचे आने के दौरान शुरू के दौर में रोवर एक एयरोशेल से ढका था.कैप्सूल की गति धीमी होने लगी जब एक बार वह मंगल की हवा से गुजरने लगा और पैराशूट के खुलने के बाद उसकी गति और कम हो गई इसके कुछ समय बाद ही चीन की सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने घोषणा कर दी कि चीन ने पहली बार मंगल पर कोई निशान छोड़ा है यह देश के अंतरिक्ष अन्वेषण का अहम कदम है.मंगल पर अंतरिक्ष यान भेजने का यह चीन का पहला प्रयास नहीं है करीब 10 वर्ष पहले चीन ने यिगहुओ अभियान भेजने का प्रयास किया था जब रूस के रॉकेट उसे उड़ाने में सफल नहीं हुआ था और वह यान पृथ्वी की वायु मंडल में ही रहते हुए जल गया था यदिज्योरॉन्ग रोवर सफलतापूर्वक मंगल पर चलने लगा तो चीन पहला ऐसा देश हो जाएगा जिसने एक ही मंगल अभियान में आर्बिटर लेंडर और रोवर स्थापित किया होगा.ज्योरॉन्ग रोवर कैमरा मंगल की चट्टानों की तस्वीरें लेंगे इन तस्वीरों से वहां के खनिजों की जानकारी प्राप्त की जाएगी इसके अलावा ज्योरॉन्ग रोवर  में एक स्पेक्ट्रोमीटर भी लगा है जिसमें लेजर आधारित तकनीक है जो चट्टानों को अध्ययन के लिए काट भी सकता है रोवर का मैग्नेटोमीटर आसपास की मैग्नेटिक फील्ड का जानकारी हासिल करेगा इसके बाद इससे यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि मंगल ने आखिर अपने तगड़ी मैग्नेटिक फील्ड गवा कैसे दी.

source.https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/news18+hindi-epaper-pradehin/janie+chin+ke+mangal+grah+par+bheje+gae+nae+rovar+ke+bare+me-newsid-n280114622?s=a&uu=0x1997cf9393abe3a3&ss=pd

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