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फैक्ट चेक: Jio की 5G की टेस्टिंग की वजह से पक्षियों के मरने का दावा, जानें हकीकत

जब से 5जी के आने की बात हो रही है तब से ये कहा जा रहा है कि इससे हमारी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल जाएगी. हालांकि, इसके आने से हेल्थ को लेकर एक बड़ी चिंता ज़ाहिर की जा रही है. ऐसा कहा जाता है कि सिग्नल भेजने और कैच करने के लिए जो मोबाइल टावर/एंटेना लगाए जाते हैं उनके नज़दीक रेडिएशन की फ्रिक्वेंसी काफी होती है जो कि आदमी के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचाती है. और 5जी में डेटा को तेज़ी से ट्रांसफर करने के लिए काफी ज्यादा टावर लगाने होंगे. हालांकि, एक्सपर्ट्स इससे सहमत नहीं हैं उनका कहना है कि अगर भारत रेग्युलेटरी अथॉरिटी द्वारा बनाए गए सुरक्षा उपायों का पालन करता है तो ऐसा कुछ नहीं होगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसको खारिज करता है. उसका कहना है कि रेडियो फ्रिक्वेंसी की वजह से सिर्फ एक ही प्रभाव पड़ेगा और वह है शरीर का तापमान बढ़ना. शरीर का तापमान बढ़ने से स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला है.फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के एडिशनल डायरेक्टर वैभव मिश्रा का कहना है कि आदमी के शरीर को आयोनाइज़िंग नेचर वाली फ्रिक्वेंसी ही नुकसान पहुंचाती है जबकि मोबाइल से निकलने वाली फ्रिक्वेंसी नॉन आयोनाइज़िंग नेचर की होती है, जो कि शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती. उनका कहना है कि अभी तक ऐसा कोई डेटा कलेक्ट नहीं हो पाया है कि जिससे पता चले कि 5जी रेडिएशन की वजह से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है.


देश में कोरोना वायरस का मामला अभी खत्म ही नहीं हुआ था कि बर्ड फ्लू के आगमन ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वायरल जिसमें दावा किया जा रहा है कि, रिलायंस जियो द्वारा किए गए 5 जी टेस्ट के कारण पक्षी मर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है कि बर्ड फ्लू फैल रहा है।

ट्विटर और फेसबुक कई यूजर्स हिंदी में एक मैसेज शेयर कर रहे हैं। इस मैसे में लिखा है कि, खबर फैल रही है कि Jio के 5G टेस्टिंग से पक्षी मर रहे हैं और लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा है कि, बर्ड फ्लू फैल रहा है। वन इंडिया की फैक्ट चेक टीम ने इस वायरल मैसेज की पड़ताल की है। जांच के दौरान एक बेहद सी महत्वपूर्ण जानकारी सामने निकलकर आई। भारत सरकार ने अभी तक 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की है तो ऐसे में 5G टेस्टिंग का सवाल ही नहीं उठता है।

इसके अलावा रिलायंस जियो ने भी 5G परीक्षण करने की बात से इनकार किया है। देश के कई राज्यों में पक्षियों की मौतों के कारण एवियन इन्फ्लूएंजा है। जिस कारण से सैकड़ों की संख्या में पक्षियों की मौत हो रही है। दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो चुकी हैं। राज्य सरकारें चिकन के आयात को रोक रही हैं। अभी तक केंद्र सरकार ने किसी भी दूरसंचार इकाई को भारत में 5 जी तकनीक का परीक्षण करने की अनुमति नहीं दी है। केंद्रीय आईटी और दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल ही में कहा था कि 5 जी तकनीक के लिए बहुप्रतीक्षित परीक्षण जल्द ही शुरू होंगे। हाल ही में दूरसंचार विभाग ने पहली मार्च से होने वाली स्पेक्ट्रम नीलामी में हिस्सा लेने के लिए आवेदन मंगाए हैं।

ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के प्रेसिडेंट रामचंद्रन ने कहा, ‘5जी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के उलट हमारी स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाएगा. जहां तक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने की बात है तो इस तरह की बातें उस वक्त भी उठाई जा रही थीं जब 3जी और 4जी नेटवर्क आया था. जिन लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है वे लोग इस तरह की बातें उठाते हैं.’

वैज्ञानिकों ने भी इस तरह के दावों की निंदा की थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 और 5-जी तकनीक के बीच संबंधों की बात पूर्ण बकवास है और यह जैविक रूप से संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने कहा था कि जो लोग ऐसे पोस्ट शेयर कर रहे है वो सब कांस्पेरेसी थ्योरी को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें 5-जी की मदद से कोरोना वायरस संक्रमण फैलने का झूठा दावा किया जा रहा है।

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