तनु वेड्स मनु के चिंटू भैया की पत्नी है हुस्न की मल्लिका, रसिका पहली नज़र में ही चुरा लेती है लोगों का दिल

दोस्तों दिल्ली में जिंदगी से लेकर मोहब्बत तक के सबक सीखने वाले जीशान ने हिंदी सिनेमा की अपनी पारी में पहली ही गेंद पर सिक्सर मारा। उन्हें लोग रांझणा के मुरारी, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के चिंटू, रईस के सादिक और ठग्स ऑफ हिंदोस्तान के शनीचर के तौर पर याद करते हैं, तो इसे ही वह अपनी सबसे बड़ी जीत मानते हैं। जीशान ने लीड हीरो के तौर पर फिल्म 377 अब नॉर्मल में एक चुनौती भरा किरदार भी किया है.जीशान अय्यूब के द्वारा दिए गए इंटर्वयू में जीशान ने बताया की मैं शुरू से सामाजिक राजनीतिक बातें करता रहा हूं। मुझे लगा कि ये भी एक मौका है अपनी बात कहने का और लोगों का ध्यान समाज के एक अहम मुद्दे की तरफ खींचने का। ऐसे बहुत सारे लोग मेरी जान पहचान में भी हैं। आसपास तमाम सच्ची कहानियां भी हैं लेकिन मैं उसमें गया नहीं। मेरा मानना है कि अदालत के आदेश भर से कुछ बदलता नहीं है। बदलाव आता है जब समाज अपनी सोच बदलता है।

मैं शुरू से सामाजिक राजनीतिक बातें करता रहा हूं। मुझे लगा कि ये भी एक मौका है अपनी बात कहने का और लोगों का ध्यान समाज के एक अहम मुद्दे की तरफ खींचने का। ऐसे बहुत सारे लोग मेरी जान पहचान में भी हैं। आसपास तमाम सच्ची कहानियां भी हैं लेकिन मैं उसमें गया नहीं। मेरा मानना है कि अदालत के आदेश भर से कुछ बदलता नहीं है। बदलाव आता है जब समाज अपनी सोच बदलता है। ये बदलाव फिल्मों का कलेवर बदलने से आया है। पहले ज्यादातर कहानियां मुंबई की होती थीं, बहुत हुआ तो कहानी विदेश चली जाती थी। देश के छोटे शहरों और कस्बों की कहानियों की तरफ ध्यान जाना अब शुरू हुआ है। ऐसा नहीं कि सपोर्टिंग रोल्स पहले की फिल्मों में नहीं थे। अनुपम खेर, परेश रावल यहां तक कि मनोज बाजपेयी भी जब तक लीड रोल में नहीं आए, ऐसे किरदार ही करते थे। लगान की तो पूरी टीम इन्हीं कलाकारों से बनी थी।

किसी भी कलाकार के करियर में इससे बड़ा इनाम दूसरा नहीं हो सकता कि उसे उसके किरदार के नाम से पुकारा जाए। लोगों को मुरारी याद रहता है, चिंटू याद रहता है या शनीचर उनके जेहन में अटक जाता है तो यही किसी कलाकार की सबसे बड़ी जीत है। यही तो करने आए थे। पहली फिल्म तो मुझे मुंबई आने के पहले 15 दिन में पहले ही ऑडीशन में मिल गई थी। लेकिन, रांझणा से पहले काम तो मिल रहा था पर पैसे नहीं मिल रहे थे। आर्थिक मजबूती मेरे जीवन में इसी फिल्म से आई। आनंद एल राय के लेखक हिमांशु और मैं कॉलेज में एक साथ थे। आनंद से मैं पहले एक बार मिल चुका था। फिर जिस अवार्ड समारोह में मुझे नो वन किल्ड जेसिका के लिए पुरस्कार मिला, वहां भी आनंद मिले।

हिमांशु के घर पर भी एक बार मुलाकात हुई। इसके बाद रांझणा के ऑडीशन्स में शामिल हुआ। आनंद का मुझ पर भरोसा बना, इसके बाद मैंने उनके साथ तनु वेड्स मनु रिटर्न्स और जीरो की। कोई निर्देशक आपको अपनी फिल्म में दोहराता तो एक कलाकार के तौर पर आपका भरोसा मजबूत होता है। हंसल मेहता के साथ शाहिद के बाद अब तुर्रम खां कर रहा हूं। हम 2010 में मुंबई आए और मुझे पैसे 2013 में ढंग के मिलने शुरू हुए। इन तीन साल घर की पूरी जिम्मेदारी एक तरह से उन्होंने अकेले अपने कंधे पर उठाए रखी। वह टेलीविजन पर उन दिनों काफी काम कर रही थीं, हमारा घर उसी से चलता था। मैं अपनी पत्नी और बेटी के साथ काफी वक्त बिताता हूं। घूमता फिरता हूं और जिंदगी को महसूस करता हूं।

मेरा मानना है कि एक कलाकार का जिंदगी के करीब रहना जरूरी है नहीं तो परदे पर सब कुछ बहुत नकली दिखने लगता है। दोस्तों अभी के समय में जीशान अपनी पत्नी को लेकर काफी चर्चा में है.जीशान की तरह ही उनकी पत्नी रसिका भी बॉलीवुड में ही सक्रिय है और इन दोनों की जोड़ी भी जब एक साथ लोगों को नजर आती है तब सभी लोग यही कहते हैं कि यह दोनों एक दूसरे के साथ बहुत शानदार नजर आते हैं। रसिका ना सिर्फ बॉलीवुड की कई फिल्मों में अदाकारी कर चुकी है बल्कि कई फिल्मों का लेखन भी कर चुकी है। आइए आपको बताते हैं कैसे जीशान की खूबसूरत पत्नी को देखकर लोग उनके दीवाने हुए जा रहे हैं और यह कह रहे हैं कि जीशान बहुत खुशकिस्मत हैं जो उन्हें रसिका के जैसी खूबसूरत पत्नी मिली है।

Related Posts