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हजारों साल से बनी हुई है लोहबान की मांग, एक लीटर तेल की कीमत 4.5 लाख, आखिर क्या बनाता है इन्हें खास?

पुरे विश्व में अनेक पोधे पाए जाते है.जो धार्मिक कार्यों में काम आते है.इसी तरह के पोधो का महत्व बढ़ जाता है.एक ऐसा ही नाम लोहबान है.जो धार्मिक कार्यों में उपयोग के कारण हजारों वर्षो से लोगो के बीच ऐनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है.ईसाई समाज के सबसे बड़े तबके रोमन कैथोलिक चर्चो में लोहबान का उपयोग बहुत ज्यादा और शुभ माना जाता है.इसकी आपूर्ति के लिए अनेक व्यापारिक मार्गो से अनेक देशों में आपूर्ति की जाती थी.मुख्यत व्यापारियों द्वारा इथोपिया से भारत और इथोपिया से ईरान तक अलग अलग रास्ते उपयोग करते थे.लोहबान अपनी खुशबू के कारण पूरे विश्व में फेमस है.उसको मांग लगातार बढ़ती जा रही है.

इतनी खपत के कारण अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमत 4.5 लाख रुपए प्रति लीटर है.लगभग 6 हजार साल पहले सुगंधित लोहबान की मांग होने लगी थी आज हालत ऐसे है कि यह विलुप्त होने की कगार पर है.तकरीबन 500 तरह का पेड़ो की प्रजातियां है जिसमे लोहबान बनता है लेकिन इथोपिया के पेड़ो में रस से बनने वाले लोहबान की मांग सावर्धिक है.किसान लोहाबान बनाने के लिए उस पेड़ की छाल पर कट लगा देते है जिससे रस निकलता रहे जब वो रस सुख जाता है जिसमे तकरीबन 15 दिन लगते है उसके बाद घर लाकर अच्छे से साफ किया जाता है और बाजारों में बेच दिया जाता है.लोहबान की मांग का सबसे ज्यादा खपत तो रोमन कैथोलिक चर्च में होती है क्योंकि वहा हर साल 50 मिट्रिक टन लोहबान की आवश्यकता होती है.

आप सोच सकते है की धार्मिक अनुष्ठानों में लोहबान कितना जरूरी है.पुरातत्व के अनुसार लोहबान का व्यापार तकरीबन 3000 टन होता था जिसमे भारत सऊदी अरब और इथोपिया शामिल था.अपनी खुशबू के कारण सबकी पसंद बन चुका है प्राकृतिक लोहबान.लेकिन अब इसका उपयोग दवाई और कॉस्मेटिक आइटम में होने के कारण इसकी खपत लगातार बढ़ती जा रही है.बाजार भाव में माना जा रहा है की लोहबान तेल 406 मिलियन डॉलर का व्यापार करेगा.लेकिन आपको बता दे लोहबान पर विलुप्त होते पेड़ भी खतरा है.मानवीय आपदा और प्राकृतिक आपदा इसको अधिक नुकसान हुआ है ।

sorce

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